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मैं पहले जैसा राह में

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब बात ही नही तो मिलना मिलाना कैसा।
        
                                                    
                            
मैं पहले जैसा राह में तुम्हारी पतवार जैसा।।

तुम्हारी नाराजगी किस लिए समझा ही नही।
खरा समझता खुद को तुम्हारे एतबार जैसा।।

न तुम जिद्दी न मैं अड़ियल ये सब किस लिए।
दिखलाती कुछ दिखता दुश्मनी के वार जैसा।।

गनीमत है कि उलझन को सुलझाओगी तुम।
तरीका निकालेगी फ़ैसला पिछली बार जैसा।।

कौन सही कौन गलत जानना कौन चाहता।
दिन गुज़रता 'उपदेश' ख्वाब में इज़हार जैसा।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
2 दिन पहले
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