विज्ञापन

लिखकर मुस्कुराते हैं हम

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दिल में दर्द की धारा बहा कर
        
                                                    
                            
किस तरह छटपटाते है हम
भरे पूरे परिवार में रह कर
कभी कभी अकेला पाते हैं हम

कहने को कितना कुछ मगर
फिर भी खामोश रह जाते हैं हम
मोहब्बत ने अन्दर दम तोड़ दिया
उसका मातम बनाते है हम

जिनके ख्वाब देखे उन्हें पा लिया
नसीब पर इतराते है हम
अनचाहे दर्द कहे किससे 'उपदेश'
लिखकर मुस्कुराते है हम

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
2 सप्ताह पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3565 कविताएं

View Profile