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लिखकर मुस्कुराते हैं हम

                
                                                         
                            दिल में दर्द की धारा बहा कर
                                                                 
                            
किस तरह छटपटाते है हम
भरे पूरे परिवार में रह कर
कभी कभी अकेला पाते हैं हम

कहने को कितना कुछ मगर
फिर भी खामोश रह जाते हैं हम
मोहब्बत ने अन्दर दम तोड़ दिया
उसका मातम बनाते है हम

जिनके ख्वाब देखे उन्हें पा लिया
नसीब पर इतराते है हम
अनचाहे दर्द कहे किससे 'उपदेश'
लिखकर मुस्कुराते है हम

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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2 सप्ताह पहले

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