कुछ एक लेखनी बिंदास रास्ता दिखती।
उसकी हिदायतें किस तरह कमाल लाती।।
हर एक ठोकर बेमिसाल उस के सफर की।
लोग कुछ भी कहे वह मिसाल बन जाती।।
किस्मत का फैसला समझकर चुप नही है।
मेहनत के ईनाम से वो फूली नही समाती।।
उसकी कहानी के पन्ने पलटकर देख लेना।
हिम्मत उम्मीद मुस्कान की झलक आती।।
सवाल का जवाब 'उपदेश' लाजवाब होता।
बार बार लिखकर अपनी कहानी दोहराती।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'