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एहसास के सहारे ख्वाहिशों में खो जाना।

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम्हारे दुख में तन-मन का भारी हो जाना।
        
                                                    
                            
तुम्हारी खुशी के लिए बेवजह मुस्कराना।।

प्रेम में परवाह करना मेरी आदत बन चुकी।
तुम्हारी खामोशी से खुद को बेचैन पाना।।

तुम्हें पाने से ज्यादा सुनना जरूरी लगता।
मेरे दिल में सुकून तुम्हारे नाम से आना।।

कभी पाने की जिद्द रही 'उपदेश' अब नही।
जब भी तड़पे तब उन्हें भी परेशान पाना।।

अब मत पूछना तूँ कि कैसा है प्रेम हमारा।
एहसास के सहारे ख्वाहिशों में खो जाना।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
2 महीने पहले
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