आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

एहसास के सहारे ख्वाहिशों में खो जाना।

                
                                                         
                            तुम्हारे दुख में तन-मन का भारी हो जाना।
                                                                 
                            
तुम्हारी खुशी के लिए बेवजह मुस्कराना।।

प्रेम में परवाह करना मेरी आदत बन चुकी।
तुम्हारी खामोशी से खुद को बेचैन पाना।।

तुम्हें पाने से ज्यादा सुनना जरूरी लगता।
मेरे दिल में सुकून तुम्हारे नाम से आना।।

कभी पाने की जिद्द रही 'उपदेश' अब नही।
जब भी तड़पे तब उन्हें भी परेशान पाना।।

अब मत पूछना तूँ कि कैसा है प्रेम हमारा।
एहसास के सहारे ख्वाहिशों में खो जाना।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर