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वह क्षण काल्पनिक मरीचिका नही।

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम छलनी से संभलकर देखना।
        
                                                    
                            
चाँद का बिम्ब भी तुम्हें देख लेगा।।

और बादलों के आँचल मे 'उपदेश'।
लजा कर अपना मुँह छिपा लेगा।।

वह क्षण काल्पनिक मरीचिका नही।
अमिट संगम से प्यास को बुझा देगा।।

खुद विधाता साक्षी होंगे मौन प्रेम के।
आशीर्वाद के बतौर भरापूरा घर देगा।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
12 मिनट पहले
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