कहने को कमाने के तरीके,
मगर आमदनी दिखने लगी।
थोड़ा बहुत हम कमाने लगे,
सब को कमाई देखने लगी।
कभी लगता रहा रुपया क्या,
अब उसकी कीमत दिखने लगी।
खुली बाजू की शर्ट पहनी जब,
तब अपनी कलाई दिखने लगी।
कुछ लोग बैठे बैठे नोट छापते,
उन्हें पेंशन में दवाई दिखने लगी।
उम्र निकली 'उपदेश' ढीली ढीली,
जरूरत पर पाई पाई दिखने लगी।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद