विज्ञापन

ज़ख्म परिस्थितियाँ देती

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वायदों पर एतबार मोहब्बत में हो ही जाता।
        
                                                    
                            
ईमानदारी की राह पर भी 'उपदेश' रार आता।।

ज़ख्म कोई देता ही नही परिस्थितियाँ देती।
ज़माने का दस्तूर उनकी तकलीफें और बढ़ाता।।

उनकी खामोशी उनकी नही मजबूरी की होगी।
राह बदलकर जिन्दगी में यादो का नासूर आता।।

जो हर बात का तोड़ निकाल लेती घर परिवार में।
उसकी जिन्दगी में भी उथल-पुथल जरूर आता।।

तमाशा देखते-देखते वो तमाशे के आदी हो गये।
ऐसी जिन्दगी से बताओ किसे नही फितूर आता।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7393 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

13121 कविताएं

View Profile