वायदों पर एतबार मोहब्बत में हो ही जाता।
ईमानदारी की राह पर भी 'उपदेश' रार आता।।
ज़ख्म कोई देता ही नही परिस्थितियाँ देती।
ज़माने का दस्तूर उनकी तकलीफें और बढ़ाता।।
उनकी खामोशी उनकी नही मजबूरी की होगी।
राह बदलकर जिन्दगी में यादो का नासूर आता।।
जो हर बात का तोड़ निकाल लेती घर परिवार में।
उसकी जिन्दगी में भी उथल-पुथल जरूर आता।।
तमाशा देखते-देखते वो तमाशे के आदी हो गये।
ऐसी जिन्दगी से बताओ किसे नही फितूर आता।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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