आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

ज़ख्म परिस्थितियाँ देती

                
                                                         
                            वायदों पर एतबार मोहब्बत में हो ही जाता।
                                                                 
                            
ईमानदारी की राह पर भी 'उपदेश' रार आता।।

ज़ख्म कोई देता ही नही परिस्थितियाँ देती।
ज़माने का दस्तूर उनकी तकलीफें और बढ़ाता।।

उनकी खामोशी उनकी नही मजबूरी की होगी।
राह बदलकर जिन्दगी में यादो का नासूर आता।।

जो हर बात का तोड़ निकाल लेती घर परिवार में।
उसकी जिन्दगी में भी उथल-पुथल जरूर आता।।

तमाशा देखते-देखते वो तमाशे के आदी हो गये।
ऐसी जिन्दगी से बताओ किसे नही फितूर आता।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
1 hour ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर