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हमने भी याद ओढ़ रखी

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेरी ही तरह किसी इंतजार में टिकी।
        
                                                    
                            
सादगी से सुसज्जित उसकी आशिकी।।

संदेश देने का तरीका रुआबदार उसका।
सपने साथ के देखती एक कदम बाकी।।

वक्त से बिना पूछे उसने दूरी लिख ली।
अब एक दूसरे की जरूरत में है साक़ी।।

साल की तरह हमने भी याद ओढ़ रखी।
कभी-कभी दिख जाती ख्वाब में झाँकी।।

तन्हाई में बैठा नजर आ जाता 'उपदेश'।
तस्वीर धुंधली ही सही शायद है लकी।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
3 घंटे पहले
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