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ग़म की आँधी

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेहनत में दर्द क्या, किसी ने जाना कभी।
        
                                                    
                            
कीमत पूरी लगी बेबस रहा पैमाना कभी।।

लचीले पेड़ की तरह झेली है गम की आँधी।
मगरूर पेड़ों का देखा नही अफ़साना कभी।।

छोटे से बड़ा बनना है आसान बेशक नही।
सब्र करके जिन्दगी में बदला ठिकाना कभी।।

मेहनत बढ़ती देख किस्मत भी बदलने लगी।
छालों में अमीरी 'उपदेश' कहे ज़माना कभी।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
4 घंटे पहले
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