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फ़रिश्ते आये ज़िन्दगी में

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बिछड़ने का मेरे हिस्से में गम आया।
        
                                                    
                            
उधेड़बुन में जीवित एक वहम आया।।

हकीकत की दुनिया में ख्वाहिशें दूसरी।
उस वज़ह से सीधी राह पर भ्रम आया।।

फ़रिश्ते आये ज़िन्दगी में एक नहीं कई।
हरेक मानव प्रकाश लेकर अहम आया।।

पार कर दरिया मुश्किले आसान होंगी।
गैर आए सफर में खुदा को रहम आया।।

इसे कैसे निकाले उन्हें इस व्यवसाय से।
माफ़िक रहे 'उपदेश' से और दम आया।।
- उपदेश कुमार शाक्यवार 'उपदेश'
 
एक महीने पहले
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