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प्यार में चमकती जुगनू लगे तितली जैसी

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तन्हाई का जोर और मजबूरी का आलम।
        
                                                    
                            
तरीका खोजता 'उपदेश' जिद्द पर कायम।।

दिल मजबूर कर रहा तुमसे बात करने को।
मगर फोन को उठाता नही हद पर कायम।।

प्यार में चमकती जुगनू लगे तितली जैसी।
गहरे नशे में लड़खड़ा रहीं बात पर कायम।।

दूरियों के तमाशे हर रोज करतब दिखाते।
मोहब्बत में आज भी ज़ज्बात पर कायम।।

पलके बोझिल हो रहीं जैसे-जैसे रात बढ़ी।
ख्वाब में अचंभित प्रिये विस्तर पर कायम।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
13 घंटे पहले
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