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अहम के अंगारे

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            छेड़ना नही चाहती तुम्हारे अहम के अंगारों को
        
                                                    
                            
भूचाल हिला सकता है बनाये सुख के द्वारों को
हर बार मेरी शीतलता को इम्तिहान देना पड़ता
अन्यथा बर्बाद होते देखा है नदी के किनारों को
बदले ताप और दबाव से समीकरण बदल जाते
रासायनिक भौतिक क्रिया नष्ट करती बहारों को
हम अनभिज्ञ नही और अनाड़ी भी नही 'उपदेश'
सहलेंगे भूकंप के झटके बनाये रखेंगे सहारों को
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
3 वर्ष पहले
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