विज्ञापन

अदा की धनी का दगा देना

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक तो दूरी उस पर अन-फ्रेंड कर देना मुझे।
        
                                                    
                            
अजब-गजब तरीके से दर्द से भर देना मुझे।।

गुफ़्तगू की जरूरत मेरी नही तेरी भी होगी।
शोभा नही देता बिना बताए सजा देना मुझे।।

कितना आसान है रूठ कर सामने न आना।
और दिल पर पत्थर रखकर जला देना मुझे।।

हम तो इस वक्त चुप रहकर तमाशबीन बने।
उसके ऊपर अदा की धनी का दगा देना मुझे।।

किस तरह याद के रास्ते आ जाती 'उपदेश'।
अच्छा नही ख्वाब के बीच में जगा देना मुझे।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
23 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Aditya Mishra

1 कविता

View Profile