कुछ लोग मेरे पीछे टिप्पणी कर रहे हैं कि
जैसे राजा हरिशचंद्र, वैसे इनके राग।
श्वेत पहरावा दिखते , फिर लगे क्यों इनमे दाग।।
तो उनको बता दूं
बहरा सुन ध्वनि बंसी की, के बतावे राग।
ये कहन सुनन की पीटते, ज्यों होली पर फाग।।
जो लागे उनको लगावे है , जैसे फनपति नाग।
तैसे उनको दाग दिखावे हैं, बाकी पूरे हैं बेदाग।।