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जल जीने का आधार है

Umesh Prajapati

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कविता - जल
        
                                                    
                            
रचनाकार - पुष्पेन्द्र कुमार राजेश्वरी
ग्राम - बदनपुर, जिला - हमीरपुर, कक्षा - 11

जल जीवन का आधार है,
जीने का एक सहारा है।
जल है तो प्राण है,
जल नहीं तो प्राण नहीं है।

टपकता नल देखकर भी आँख बंद कर लेता हूँ,
तो आने वाले कल की प्यास को बुलावा देता हूँ।

बूँद-बूँद से सागर भरता, बूँद-बूँद से जीवन,
बचा लो इस बूँद को, यही है सच्चा पुण्य।

अरे मूर्खों, अभिमानियों! यूँ ही कर रहे हो जीवन के आधार का विनाश,
अब तो समझो, अब तो जानो, जल को बचाकर जीवन को समझो।

यूँ ही जल की बूँद होती रहेगी बर्बाद,
तो तुम जल की बूँद को देखकर पछताओगे।

अरे अब तो सुधर जाओ कलयुग के अवतारों,
मूर्खों अब तो न जल बर्बाद करो,
नहीं तो तरस जाओगे एक-एक बूँद को,
फिर प्राण त्याग दोगे।

मैं नमन करता हूँ तुम सबसे,
जल को न बर्बाद करो, नई पीढ़ी में जीवन का प्रवाह करो।

जल ही जीवन का आधार है,
जीने का एक सहारा है।
जल संरक्षण, जीवन संरक्षण।
एक महीने पहले
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