विज्ञापन

अटका और भटका

Umakant Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तेरे हुस्न के जंगल में
        
                                                    
                            
जंगल में जंगल में
तेरे हुस्न के जंगल में
मन मेरा भटका है
जुल्फों के बादल में
चंदा सा अटका है
चंदा सा अटका है...
 
3 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all