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आसमां की परी

Ujjwal Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हे मेरी आसमां की परी,
        
                                                    
                            
प्रेम गीतों से भरी,
कब तक तुम आओगी,
कब पति रूप में पाओगी,
पत्नी धर्म अपना निभाओगी,
कोमल अजब अदाओं से,
मन मेरा लुभाओगी,
कब अपने प्रेम कमलों से,
मन महल मेरा महकाओगी,
न जाने कबसे मुरझाया है ये,
मरा पड़ा है कई वर्षों से,
कब दिल में नई जान डाल जाओगी,
बेचैन हूं अभी रहूंगा जब तलक,
जब तक नहीं पा जाता तेरी एक झलक,
हे मेरी आसमां की परी,
प्रेम गीतों से भरी ,
कब अपनी स्नेहिल चमको से,
मेरे जीवन के अंधकार मिटाओगी ,
कब मेरे संग दाम्पत्य बंधन में बंध,
जन्म जन्मांतर सात जन्मों तक,
मुझसे अपना रिश्ता निभाओगी ,
चाहें हो जाए दुनिया में कितने भी समर ,
रहेगा सदा के लिए तेरा मेरा प्रेम अमर!

उतरती हो सदा ही ,
प्रेम की कसौटी पे मेरे,
मुझसे भी ज्यादा तुम खरी,
हे मेरी आसमां की परी,
प्रेम गीतों से भरी,
जब मिल जाओगी तुम मुझे,
जीवन पुष्प मेरा खिल जाएगा,
ऐसे जख्म जो कभी न भरे,
तेरे स्पर्श मात्र से सिल जाएगा,
हे मेरी आसमां की परी,
प्रेम गीतों से भरी,
तुम हो मेरे आसमां की जमी,
तुझसे पूरी होगी मेरी सारी कमी,
तुम हो मेरी समझ के परे,
कवि कल्पना के तुम पार हो,
कहां है कोई शब्द शब्द भंडार में,
जो तृण मात्र भी तुझे बयान करे,
तुम तो इन सबसे अपार हो,
हे मेरी रूप की रानी,
ना बरसाओ नेत्रों से इतने पानी,
कहीं हो जाए न शरीर खत्म,
केवल कंकाल भर बच जाए,
हो जाए न कमी जल की जग में,
कहीं सब सूखा अकाल न पड़ जाए,
तेरे साथ बंधन में बंध,
दुनिया के सारे बंधनों से मुक्त हो जाऊं,
चाहें हो जाऊं क्यों न मै निर्धन कंगाल,
तेरे होने भर से सारे सुखों ,सारे रत्नों से युक्त हो जाऊं!
7 महीने पहले
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