विज्ञापन

दर्द युवा का

Udayvir Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            समझे कौन दर्द युवा का,है दुविधा में जिंदगानी।
        
                                                    
                            
फ़कत ख्वाहिस इनकी,बस लिखनी इक कहानी।
निशा दिवस परवान चढ़े,बस खातिर मंजिल की।
भाव भावना दिल में गूजे,अपने अभिवावक की।
इसी पटकथा में गुजरे, हर इक युवा की जवानी।
समझे कौन दर्द युवा का,है दुविधा में जिंदगानी।।
बरसों बरस करे तैयारी,निज लक्ष्य को पाने को।
इंतजार करता बरसों, एक इम्तिहान दे पाने को।
तन मन धन अर्पण करता, एक नौकरी पाने को।
जूझता दिल द्वंद्व से,निज पथ पर चल पाने को।
आशा निराशा के चक्रव्यूह से,गुजरे युवा जवानी।
फ़िर हो जाए लीक पेपर तो,दुविधा में जिंदगानी।
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all