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लड़के जो घर से निकल ते है

Tushar Sirra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक ख्याल जो हर वक्त रहता है
        
                                                    
                            
एक दर्द जो हर वक़्त रहता है

उस रात मं घर से निकला क्यो
घर छोड़ के शहर मं निकला क्यो

जो पा नहीं सकता
वो छोड़के आ गया मं

घर के नाम पे जन्नत मिली थी
मुंह मोड़ के आ गया म

मेरी ओर तो देखो
सुकुन के लिए मंदिर भागता हू

बीते दीनो को याद करके
मं पुरी पुरी रात जगता हू

क्या हुआ था मुझको
कहां जा रहा था म

माँ का उदास चहरा
छोड़ के आ रहा था मं

अब क्या ही पा लिया मैने
अब क्या ही ओर पाउंगा

जिस गांव से म निकला हु
कभी वापस भी कभी जा पाऊंगा
3 महीने पहले
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