एक ख्याल जो हर वक्त रहता है
एक दर्द जो हर वक़्त रहता है
उस रात मं घर से निकला क्यो
घर छोड़ के शहर मं निकला क्यो
जो पा नहीं सकता
वो छोड़के आ गया मं
घर के नाम पे जन्नत मिली थी
मुंह मोड़ के आ गया म
मेरी ओर तो देखो
सुकुन के लिए मंदिर भागता हू
बीते दीनो को याद करके
मं पुरी पुरी रात जगता हू
क्या हुआ था मुझको
कहां जा रहा था म
माँ का उदास चहरा
छोड़ के आ रहा था मं
अब क्या ही पा लिया मैने
अब क्या ही ओर पाउंगा
जिस गांव से म निकला हु
कभी वापस भी कभी जा पाऊंगा
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