जिसे सब त्याग देते हैं, उसे शिव पाल लेते हैं
बना कर सर्प की माला, गले में डाल लेते हैं
सुधा देवों को दे कर, पी गये सारा गरल शंकर
चिता की भस्म अपनी देह पर महाकाल लेते हैं
- त्रिशिका धरा