जिसे सब त्याग देते हैं, उसे शिव पाल लेते हैं
बना कर सर्प की माला, गले में डाल लेते हैं
अगर यम भी खड़े हों दर पे, जिसके प्राण हरने को
जपे शिव शिव तो शिव मृत्यु भी उसकी टाल देते हैं।
- त्रिशिका धरा