वो तो अबके बरस भी नहीं आएगा
बैरी सावन मुझे और तड़पाएगा
"पी कहाँ, पी कहाँ" बोल डस जाएँगे
मेरा झगड़ा पपीहा से हो जाएगा
— त्रिशिका धरा