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आँख में कोई नया

Trishika Srivastava

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आँख में कोई नया ख़्वाब न बुन पाऊँगी
        
                                                    
                            
अब कोई दूसरा हमराह न चुन पाऊँगी
कोई संगीत मुझे रास नहीं आएगा
तेरी धड़कन की सदा गर नहीं सुन पाऊँगी
— त्रिशिका धरा
2 महीने पहले
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