आँख में कोई नया ख़्वाब न बुन पाऊँगी
अब कोई दूसरा हमराह न चुन पाऊँगी
कोई संगीत मुझे रास नहीं आएगा
तेरी धड़कन की सदा गर नहीं सुन पाऊँगी
— त्रिशिका धरा
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