विज्ञापन

बुरे हालातो का क्या करूं l

Thalaivaa Akshat

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं अपने इन बुरे हालातो का क्या करूं?
        
                                                    
                            
दिन तो गुजर जाता है ,इन रातों का क्या करूं?

तर्क-ए- शायरी तो मैं कब का कर चुका होता,
मगर दिल में उठते इन जज्बातों का क्या करूं?
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all