वो जो सपना देखा था मैंने
उससे अब भी उतनी ही दूरी है
मंज़िल की तलाश में है दिल
ये कहानी अबतक अधूरी है।
आगे बढ़ना ये चाहता तो है
पर तय करनी लंबी दूरी है
हर क़दम पे कल का डर बैठा है
ये मन की कैसी मज़बूरी है
मंजिल की तलाश में है दिल
ये कहानी अबतक अधूरी है।
हर सब्र का बांध टूट रहा है,
हर हार ये तलब लुट रहा है
आगे बढ़ते जाने की ख्वाहिश में
आज भी पीछे छूट रहा है,
बीत रहे इन पलों की खातिर
लक्ष्य पाना अब ज़रूरी है,
मंज़िल की तलाश में है दिल
ये कहानी अबतक अधूरी है।
आने वाले कल की खातिर
करनी कहानी अब पूरी है।।
तेजस्वी मिश्रा (पायल)