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Tapas Hazra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक 'सैल्स-एक्सक्यूटिव' ने
        
                                                    
                            
मेरा दरवाजा खटखटाया,
और सभी उत्पादों का
देर तक गुणगान गाया,
उन सभी का उसने-
सैंपल भी दिखाया ।

सर ! ये 'परिश्रम' है-
जो पुरानी चीज़ है,
और ये फैशन है /
जो घर-घर चलती है
ये 'सलीका' और ये ' सहूर' है
जो युवाओं से बहुत दूर है
ये 'भाग्य' और ये 'भगवान' हैं
इनके लाभों से सभी अनजान हैं ।

ये 'चापलूसी' और ये है 'बेईमानी'
इनकी तारीफ तो कई करेंगें / मुंहजबानी

और सर, ये 'ईमानदारी' है-
जिसे चाहती तो दुनिया सारी है
कीमत भी बड़ी भारी है / पर बिकती नहीं है
वैसे दुनियादारी में-
ये दिखती भी नहीं है ।

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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5 वर्ष पहले
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