एक 'सैल्स-एक्सक्यूटिव' ने
मेरा दरवाजा खटखटाया,
और सभी उत्पादों का
देर तक गुणगान गाया,
उन सभी का उसने-
सैंपल भी दिखाया ।
सर ! ये 'परिश्रम' है-
जो पुरानी चीज़ है,
और ये फैशन है /
जो घर-घर चलती है
ये 'सलीका' और ये ' सहूर' है
जो युवाओं से बहुत दूर है
ये 'भाग्य' और ये 'भगवान' हैं
इनके लाभों से सभी अनजान हैं ।
ये 'चापलूसी' और ये है 'बेईमानी'
इनकी तारीफ तो कई करेंगें / मुंहजबानी
और सर, ये 'ईमानदारी' है-
जिसे चाहती तो दुनिया सारी है
कीमत भी बड़ी भारी है / पर बिकती नहीं है
वैसे दुनियादारी में-
ये दिखती भी नहीं है ।
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