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राखी: एक अटूट बंध - दिनेश कुमार

Tanuj Rukansar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            न समझो डोरी मात्र इसे,
        
                                                    
                            
ये अटूट बंधन है प्रेम का,
न समझो धागा मात्र इसे,
ये है स्नेह प्रिय बहना का।

जड़ा है जो मोती इस पर,
प्रेम बहन का दिखलाता है,
लाल रंग जो है चढ़ा इस पर,
त्याग बहन का दिखलाता है।

महीनों लगे जिसे सजाने में,
पल में कलाई भाई की चढ़ जाता है,
है बंधा जो वादा इस डोरी में,
भाई अंतिम क्षण तक उसे निभाता है।

कविता - दिनेश कुमार
2 महीने पहले
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