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जिंदगी की हकीकत

Swechha Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब जिंदगी की हकीकत जान जाओगे
        
                                                    
                            
हर कदम पर बिखरे अरमानो के घरौंदे पाओगे।
किस तरह सुनाओगे अपने गमो की दास्तां
ना ही लफ्ज होंगे,ना ही आँखो से बयां कर पाओगे।
कैसे संभालोगे अपने लडखडाते हुऐ कदमो को
नाउम्मीदी और नाकामी के अंधेरो मे जो घिर जाओगे।
हर एक सांस पर होगी तकलीफ तुम्हे,
जब खुद ही खुद की खता बन जाओगे।।


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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