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पिछला पन्ना

Suryapal Namdev

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पिछला पन्ना
        
                                                    
                            
डायरी का पिछला पन्ना हूँ मैं, अनकहा, अनलिखा, थोड़ा मुड़ा हुआ ।
सारी खुशियाँ पहले पन्नों पर बाँट दीं, मेरे हिस्से आया सिर्फ़ बचा हुआ ।।

मुझ पर कोई तारीख़ नहीं, न कोई शीर्षक, न कोई नाम ।
बस एक कोना भीगा हुआ, शायद किसी आँसू का इनाम ।।

कभी कभी कलम काँप कर रुक गई यहाँ, शब्दों ने हड़ताल कर दी ।
दर्द इतना नंगा था कि, स्याही सूखी और शर्म भर दी ।।

मैं वो सच हूँ जो लिखा नहीं गया, वो अलविदा जो कहा नहीं गया ।
वो माफ़ करना जो होंठों तक आकर, फिर से दिल में ही रह गया।

अगली नई डायरी में,
फिर से नई उम्मीदें लिखी जाएँगी।
पर मैं, पिछला पन्ना, मेरे कोरेपन पर ख़ामोशी सुनी जाएगी ।।
-सूर्यपाल नामदेव "चंचल"
2 महीने पहले
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