हम खोते रहे और भुलाते रहे
भाग्य कह कह कर दिल बहलाते रहे ,
क्याक्या खोया हमने बता न सके
कीमत कहें क्या चुका न सके ||
कुछ अपना भी था कुछ पराया भी था
वो भी खोया जो अब तक न पाया ही था ,
मन बेबस बेचारा खताएँ गिने
पिछली यादों में अपने पराये गिने ||
ये करता नहीं तो ये होता नहीं
मन कहता कि शायद फिर तू रोता नहीं ,
दिल की न माने जहन की न सुनता रहा
बीती यादो मे आंखे भिगोता रहा ||
दिल आंसुओं के मोती पिरोता रहा
भाग्य कह कह कर नश्तर चुभोता रहा ,
हम खोते रहे और भुलाते रहे
भाग्य कह कह कर दिल बहलाते रहे ||
-सूर्य मणि दूबे 'सूर्य'