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नज़ाकत तुम्हारी

Surya Kant

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नज़ाकत तुम्हारी
        
                                                    
                            

नज़ाकत तुम्हारी
सदाकत हमारी,
इल्म ए सीना से
इल्म ए सफ़ीना
तक मसाफत
है जारी।
तेरी शोख नज़रों
की बगावत
है जारी,
सजदे में हमने
शराफत है वारी।
-सूर्यकांत शर्मा
3 महीने पहले
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