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हर ठोकर एक सबक है

Surya Kant

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर ठोकर एक सबक है,,
        
                                                    
                            

माना के ज़िंदगी में
हर ठोकर एक सबक है।
कौन जानें इसका
क्या सबब है?

ज़िंदगी के कड़वे कसैले,
खट्टे- मीठे तजुर्बों का
बस यही निचोड़ है,
के हर ठोकर
एक नया नकोर सा
सबक है।

वालिद-वालिदा
और तो और
बड़े -बजुर्गों
की भी यही तो
नसीहत है।

अपनी औ दूसरों की
ग़लतियों से जो सीखे
वही तो सबक है।
ये दुनिया!,, दुनिया
नहीं!
ये तो तजुर्बों का घर है।
यहाँ पर जो जिंदगी
को समझ ले,
उसे हिफ़ाज़त से जी ले,
वही बस असली बाज़ीगर है ।
अब ये तो इंसा की
समझ है,
कि ठोकरें और सबक?!?!
बस चंद कदम की दूरी पर
महज़ कामयाबी की
सहर है।

ये दुनिया है,
अजब -ग़ज़ब
सी डगर है।
कभी ठोकरें
कभी सबक,
बस यही तो
कामयाबी -ए -कहकशां हैं।
-सूर्यकांत शर्मा
एक महीने पहले
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