विज्ञापन

तो किसी को अदाकारी ओ शायरी से मुकम्मल रक्खा।

Surya Kant

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चिठ्ठियाँ
        
                                                    
                            

कितनी -कितनी आती
रही चिट्ठियाँ
तेरे तब्बसुम की तलाश में।
रख सारे अलम दिल में,
बस बहा दिये
अल्फ़ाज़ -ए -आबशार,
अपनी कलम के मुकम्मल
बस प्यार ओ वफ़ा की
तलाश में।
किसी को फ़िल्मी दुनिया में
फर्श से अर्श पर रख्खा,
तो किसी को अदाकारी ओ शायरी से मुकम्मल रक्खा।
फिर भी महजबीं
तो ताउम्र तपती रही,
प्यार के दयार की तलाश में।

कौन जाने के
कब्र में सकूं से
सोई है,
या के अब भी
है प्यार की तलाश में।
-सूर्यकांत शर्मा
10 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

12711 कविताएं

View Profile

Vijay BindaasRaja

192 कविताएं

View Profile