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आभासी है,, आभासी,,

Surya Kant

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आभासी है,,
        
                                                    
                            
आभासी,,
आभासी, आभासी!
सब कुछ आभासी।

हाड़ मांस से लेकर
काग़ज़ कलम तक
कुहासे सा सब कुछ
आभासी आभासी।

प्रशंसा से लेकर
दुशंसा तक
ख़्वाब से लेकर
ताबीर तक
रह गया सब कुछ
आभासी आभासी।
और तो और
सियासत से लेकर
निज़ाम तक
लफ्फाजी लफ्फाजी।

बस आभासी ककहरे
से आभासी शाबाशी।

गोया के बयाँ हो रही,
आधी आबादी के सपनों
ताबीर ।
वायदे ही वायदे
वायदे के अब
बन गए हैं कायदे
तिस पर भी
वही कमबख़्त
वही कमज़र्फ़
सब कुछ!सब कुछ!
आभासी!आभासी!
प्यार वफ़ा दोस्ती
सबके सब खुदगर्ज़ी की
मर्ज़ी के लफ़्फ़ाज़
पर सबके सब
आभासी!आभासी !
महज़ आभासी,,,।
-सूर्यकांत शर्मा
एक घंटा पहले
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Sanjai kumar

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