सचमुच,
हर चीज का - -
परख एक ,
निश्चित या - -
नियत समय पर ,
होता है l
पुत्र का परख,
उनके विवाह होने - -
या यों कहे तो ,
घर में नई - -
बधु आने के ,
बाद होता है - -
और ,
वहीं - -
पुत्री या,
बेटी का परख ,
बालापन वितने - -
और,
युवापन (युवती ) आने के - -
बाद ही ,
होती है l
इसी क्रम में ,
एक सच्चा पति का - -
पहचान (परख) ,
सच में - -
पत्नी के बीमार ,
होने की स्थिति में - -
ही होता है ,
वहीं एक ,
पत्नी का परख - -
पति की ,
गरीबी या - -
बुरे वक़्त में ,
होता है l
इसी प्रकार ,
एक सच्चा मित्र का - -
पहचान ,
या परख - -
मुसीबत आने,
या मुसीबत होने - -
पर ही होता है,
और भाय (सहोदर ) का - -
पहचान या,
परख - -
किसी से दुश्मनी,
या लड़ाई होने पर - -
होता है ,
और - -
वहीं एक ,
वहन की - -
पहचान या ,
परख - -
जायदाद के ,
बटवारे के - -
समय में ,
होता है l
इसी क्रम में ,
एक संतान - -
की पहचान या,
परख - -
बुढ़ापे में ,
होती है - -
और साथ ही ,
धर्य की पहचान - -
या परख ,
क्रोध आने या - -
क्रोध की ,
स्थिति में - -
होता है l
और अंत में,
सोने की परख - -
आग में ,
तपने के बाद - -
और वहीं ,
ज्ञानी की परख - -
संवाद होने पर ,
ही होता है l
-सुरेश कुमार झा 'अल्हर'