वह चुरा कर ले गए जब जान को
हम बचाते रह गए ईमान को
वक्त तुम बर्बाद अपना कर रहे
भूल बैठे क्यों हो नुकसान को
ज़ख़्म छोटा क्या मिला घबरा उठे
जिंदगी देती सजा इंसान को
इश्क़ में सब कुछ लुटा देना ग़लत
हुस्न की खातिर मत गवॉं सम्मान को
अब तो पत्थर में तलाशे हम ख़ुदा
और देखें बुत में भगवान को
-सूरज तिवारी