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सुपालो इंडिया देशी घी

Suraj Palodia

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            घर की रोटी, गरम पराठा,
        
                                                    
                            
घी से बन जाए स्वाद निराला।
दाल में डालो, खुशबू आए,
हर निवाला मन को भाए।
सुपालो इंडिया घी है प्यारा,
स्वाद में सबसे न्यारा-न्यारा।
रसोई की बढ़ाए शान,
हर खाने की बने पहचान।
सुबह-सुबह जब रोटी आए,
ऊपर से घी मुस्कुराए।
पराठे पर जब घी लग जाए,
भूख को और बढ़ा जाए।
खिचड़ी हो या दाल हमारी,
घी से सज जाए थाली सारी।
पूड़ी हो या हलवा प्यारा,
घी लगाए स्वाद में चार चाँद दोबारा।
त्योहारों की मिठास बढ़ाए,
लड्डू में खुशबू भर जाए।
पूजा हो या घर का भोज,
घी के बिना अधूरा सा रोज।
स्वाद में प्यारा, नाम हमारा,
सुपालो इंडिया सबसे न्यारा।
हर रसोई की बने पहचान,
सुपालो इंडिया — घर की शान।
दादी के हाथों जैसा स्वाद,
हर निवाले में खुशियों की बात।
अपनों संग जब खाना खाएँ,
सुपालो का घी जरूर लगाएँ।
गाँव की मिट्टी, घर की याद,
हर बूंद में स्वाद की बात।
सादे खाने को खास बनाए,
सुपालो घी दिल जीत जाए।
रोटी बोले — घी दो प्यारा,
पराठा बोले — थोड़ा और हमारा।
दाल कहे — खुशबू लाओ,
हलवा बोले — मुझमें मिलाओ।
खाने का स्वाद जब बढ़ाना हो,
अपनों को साथ बिठाना हो,
थाली में जब प्यार सजाना हो,
सुपालो इंडिया घी जरूर लाना हो।
नकली बातों से दूर रहो,
स्वाद और भरोसे की बात कहो।
हर घर तक इसकी खुशबू जाए,
हर दिल इसको अपना बनाए।
सुपालो इंडिया — नाम याद रखना,
स्वाद की बात हो तो नाम लेना।
घी की खुशबू, स्वाद की शान,
सुपालो इंडिया — अपनी पहचान।
आज भी वही प्यार जगाएँ,
घर के खाने का स्वाद बढ़ाएँ।
एक चम्मच जब थाली में आए,
सादा खाना भी खास बन जाए।
सुपालो इंडिया घी निराला,
हर मौसम में सबसे प्यारा।
घर-घर पहुँचे इसकी खुशबू,
दिल में बस जाए इसका स्वाद सुहाना।
रोटी से लेकर मिठाई तक,
नाश्ते से लेकर भोज तक,
जहाँ स्वाद की हो बात निराली,
वहाँ सुपालो की अपनी लाली।
स्वाद हमारा, नाम हमारा,
सुपालो इंडिया सबसे प्यारा।
हर थाली में खुशियाँ लाए,
हर निवाले को यादगार बनाए।
“स्वाद ऐसा, जो दिल में बस जाए,
नाम ऐसा, जो जुबां पर रह जाए।”
11 घंटे पहले
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