विज्ञापन

माया नगरी मुंबई

Suraj Palodia

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सपनों की चादर ओढ़े खड़ी,
        
                                                    
                            
हर धड़कन में नई लड़ी।
लहरों संग जो गीत सुनाए,
वह नगरी मुंबई कहलाए।
दिन हो चाहे काली रात,
चलती रहती इसकी बात।
हर चेहरे में एक कहानी,
मेहनत इसकी सबसे ज्ञानी।
ऊँची इमारत, लंबी राह,
हौसलों की यहाँ है चाह।
गिरकर फिर जो उठना सीखे,
मुंबई उसको गले से भींचे।
बारिश इसकी पहचान बने,
समुद्र हर अरमान तले।
भीड़ बहुत, पर दिल है प्यारा,
हर अपना लगता है सारा।
जो मेहनत को पूजा माने,
वही यहाँ मंज़िल को जाने।
सपनों को जो सच कर डाले,
मुंबई उसके संग संभाले।
-सूरज पालोदिया
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Kumar

4215 कविताएं

View Profile

Nema Ram

141 कविताएं

View Profile