फ़क़त घर नहीं आगमन के लिए
ये मिट्टी है केवल कफ़न के लिए
सदाक़त नज़र से कहानी सुनो
कथानक नहीं बस कथन के लिए
हमें तेरी चाहत की परवाह नहीं
सुख़नवर बनें हम सुख़न के लिए
-सूरज "पथिक"