विज्ञापन

बचपन में सीखा है...

Suraj Chaubey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम्हारे डूबने से उजला उजला सा दिन
        
                                                    
                            
स्याह होने लगता है,
और फिर छा जाती है रात...
ठीक इसी तरह हम भी
धवल चांदनी में सफेद सफे को
स्याह करते हैं...
धीरे धीरे।
ताकि,
दिन के उजाले में दोगुना
चमकदार हो, कल की सुबह।
बचपन में तुमसे ही सीखा है हमने...
संपत्तौ च विपत्तौ च
महताम एक रुपता…
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile