तुम्हारे डूबने से उजला उजला सा दिन
स्याह होने लगता है,
और फिर छा जाती है रात...
ठीक इसी तरह हम भी
धवल चांदनी में सफेद सफे को
स्याह करते हैं...
धीरे धीरे।
ताकि,
दिन के उजाले में दोगुना
चमकदार हो, कल की सुबह।
बचपन में तुमसे ही सीखा है हमने...
संपत्तौ च विपत्तौ च
महताम एक रुपता…
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