भारत में आज़ादी की एक नई आस जगाई,
क्रांतिकारियों ने ऐसी मशाल जलाई।
लक्ष्मीबाई बनकर मानो दुर्गा ने अवतार लिया,
मातृभूमि की खातिर अपना सर्वस्व न्योछावर किया।
भगत सिंह ने हँसकर फाँसी का फंदा स्वीकार किया,
अपने बलिदान से देश को आज़ादी का अधिकार दिया।
निःशुल्क मिली आज़ादी—ये तुम्हारी भूल है,
इस आज़ादी की कीमत क्रांतिकारियों का खून है।
कितने स्वतंत्रता सेनानी भारत को आज़ाद कराने आए,
अंग्रेज़ों के सामने डटकर अपने कदम बढ़ाए।
भारत का तिरंगा ऊँचा लहराने को,
मातृभूमि की शान बचाने को।
उनके बलिदानों को कभी न भूल जाना,
आजादी की कीमत को हमेशा पहचानना।
जिस आज़ादी के लिए उन्होंने अपना जीवन दिया,
उस भारत को बेहतर बनाने का संकल्प लेना।
-वैष्णवी शुक्ला