फूल ज़्यादा ही फूल चुके
पतझड़ भरे मौसम में,
ग़मों में जीने का भी मज़ा है
मुस्कुरा कर कभी जीने में।
जब राहें सूनी लगती हैं
साया भी साथ नहीं देता,
तब दिल चुपके से कहता है
हौसला रखना, वक़्त यहीं नहीं रहता।
कभी आँसू भी मोती बनते हैं
तन्हाई की इन राहों में,
कभी उम्मीद के दीप जलते हैं
अँधेरी सी इन चाहों में।
फूल फिर से खिल ही जाते हैं
सूखी डाली के आँगन में,
जीवन का असली रंग दिखता है
दर्द भरे इस सावन में।
- एस.यादव