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क़दमों के निशाँ

SUNIL NAYI

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तूफ़ान के आने से पहले
        
                                                    
                            
पुरानी दीवार पर,
घड़ी के क़दम रुक गए।

लेकिन... बरामदा
बारिश से बने क़दम
गीले ही छोड़ गया।

बेंच पर
मुट्ठी भर बीज पड़े थे
बाजरे के।

भोर होते ही
नदी बहा ले गई
घोंसलों के निशान।
3 महीने पहले
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Manju Sharma

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