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ख़ामोशी के किनारे

SUNIL NAYI

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            काग़ज़ की एक नाव
        
                                                    
                            
रेत के टीलों पर तैरती रही
नदी की तलाश में।

आइने का एक टुकड़ा
ढूँढता रहा चाँदनी
अमावस की रात में।

भोर होते ही
दोनों इंतज़ार कर रहे
एक ही ख़ामोशी के किनारे।

और सूरज
देखता रहा धरती को
आँखें मूंद कर।
3 महीने पहले
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